IPO kya hai ? ipo Launch kyu kiya jata hai?

आखिर कम्पनियाँ अपना आईपीओ क्यों लाती है? आईपीओ लाने के पीछे क्या कारण है ? आईपीओ क्या है ?

IPO kya hai

IPO kya hai ? ipo Launch kyu kiya jata hai?

स्टॉक मार्किट में ट्रेडिंग करने वालो के दिमाग में अक्सर कुछ सवाल जरूर आते होंगे की आखिरकार कम्पनीज अपना आईपीओ क्यों लाती है। आईपीओ लाने से कंपनीज को क्या फायदा होता है। यह बात तो हम सब जानते है की कंपनीज को जब अपना बिज़नेस बढ़ाना होता है तो इसके लिए बहुत सारे पैसो की जरुरत होती है और पैसा तो बैंक से लोन लेकर भी लिया जा सकता है तो फिर कंपनीज़ अपना आईपीओ क्यों लाती है ? IPO लेने के लिए Demat account होना जरुरी है।





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चलिए एक कहानी से इसे आसानी से समझने की कोशिश करते है की IPO kya hai?

राज नाम का एक व्यक्ति है जिसका बैकग्राउंड टेक्निकल फील्ड से है और उसे इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स की बहुत अच्छी नॉलेज है और उसके पास हैंड वाच को लेकर बहुत अच्छा बिज़नेस आईडिया है। उसे लगता है की वो मार्किट में उपलब्ध हैंड वाच से बेहतर हैंड वाच बना सकता है और वो भी बहुत कम कीमत पर। अब राज के पास एक बहुत अच्छा बिज़नेस आईडिया है और वो उसे शुरू करना चाहता है। जैसा की हर बिज़नेस की शरुआत करने में सबसे बड़ी दिक्कत आती है की बिज़नेस शुरू करने के लिए पैसा कहा से लाया जाये। राज के पास कुछ अपनी जमा पूंजी है लेकिन वो काम शुरू करने के लिहाज़ से पर्याप्त नहीं है और वो अब पैसो की कमी के चलते अपना बिज़नेस शरू नहीं कर पा रहा। अब या तो वो अपने घर वालो से या अपने दोस्तों से और या बैंक से लोन लेकर अपने कारोबार की शुरुआत करे। बैंक से लोन लेने का विकल्प उसे अच्छा नहीं लगता।

Angel Investor

अब वो अपना बिज़नेस आईडिया अपने एक दोस्त को बताता है। दोस्त को राज का बिज़नेस आईडिया बहुत अच्छा लगता है और वो राज के बिज़नेस में इन्वेस्ट करने के लिए राज़ी हो जाता है। अब राज अपनी जमा पूंजी और दोस्त के पैसो से बिज़नेस की शरुआत कर सकते है। अब राज अपनी एक कंपनी खोलता है। राज और उसका दोस्त दोनों ही कंपनी की शुरआत में अपना पैसा लगा रहे है ऐसे में उन दोनों को ही एंजेल इन्वेस्टर्स कहेंगे। दोस्त ने जो पैसा इन्वेस्ट किया है वो राज के बैंक अकाउंट में जमा न होकर कंपनी के बैंक अकाउंट में जमा होगा। मजेदार बात यह है की यह किसी प्रकार का क़र्ज़ न होकर बिज़नेस में इन्वेस्ट होगा।

राज जिसका बिज़नेस आईडिया है उसे कंपनी का प्रमोटर कहा जायेगा। मान लीजिये राज और दोस्त दोनों ने मिलकर दस करोड़ रूपए जोड़े जिसे Seed Funding कहा जाता है । अब यह राशि राज के बैंक अकाउंट में जमा न होकर कंपनी के बैंक अकाउंट में जमा होगी। इस रकम को (Initial Share Capital) कहा जाता है। जैसा की आपको पहले बताया था की राज और दोस्त दोनों को Angel Investors कहा जायेगा क्योकि यह दोनों कारोबार की शुरुआत से ही निवेश कर रहे है। अब Seed Funding के बदले दोनों निवेशकों को कंपनी के शेयर सर्टिफिकेट issue किये जायेंगे जो दर्शाता है की दोनों कंपनी में मालिकाना हक़ रखते है।



अभी दोनों निवेशकों ने कुल मिलकर दस करोड़ की राशि निवेश की है और यही अभी कंपनी की Asset है। जिसे कंपनी की Valuation भी कहा जाता है। अब कंपनी को अपने शेयर Issue करने है। शेयर Issue करना बहुत आसान है। यहाँ कंपनी की वैल्यूएशन दस करोड़ रूपए है। अगर कंपनी अपने एक शेयर की कीमत दस रूपए मानती है जिसे Face Value भी कहा जाता है। Face Value दस रूपए की जगह पांच रूपए या पचास रूपए या कुछ भी हो सकती है। यहाँ दस रूपए की face value के हिसाब से कंपनी के पास कुल एक करोड़ शेयर हुए। इन एक करोड़ शेयर्स को कंपनी के Authorized Shares कहा जाता है। अब इन Authorized Shares का कुछ हिस्सा दोनों इन्वेस्टर्स में बाँट दिया जायेगा और कुछ हिस्सा कंपनी के पास रखे जाते है।

हम मान के चलते है 30% शेयर्स प्रमोटर को मिले और 20% शेयर एंजेल इन्वेस्टर को मिले जिन्हे issued Shares कहा जाता है। 50% Authorized Shares अभी भी कंपनी के पास ही है जो किसी को भी allot नहीं किये गए है। अब कंपनी का शेयर holding Pattern कुछ इस तरह से होगा।

 

 

The Venture Capitalist

प्रमोटर के पास अब कंपनी है और अच्छी फंडिंग भी है। अब वो अपना बिज़नेस शुरू करता है और शुरआत एक यूनिट से करता है। धीरे-धीरे कारोबार आगे बढ़ता है और कुछ ही समय बाद कंपनी अच्छा मुनाफा कमाने लगती है। प्रमोटर अब एक और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की सोचता है और इसके लिए 5 करोड़ की लागत लगेगी।

अब कारोबार में अच्छा मुनाफा हो रहा है और प्रमोटर की हालत भी पहले से बहुत अलग है और वो आत्मविश्वास से भरपूर है । प्रमोटर के पास अब कारोबार का अनुभव भी है इसीलिए अब वो उन निवेशकों के पास जाता है जो नए कारोबार में निवेश करते है। अब उसे एक ऐसा निवेशक मिलता है जो 10% की इक्विटी के बदले उसे 5 करोड़ देने को मान जाता है। अब यह नया निवेशक कंपनी में 10% मालिकाना हक़ रखता है। इस तरह की फंडिंग को Series A Funding और इस तरह के निवेशक को Venture Capitalist कहा जाता है

5 करोड़ के बदले 10% इक्विटी के साथ अब कंपनी की वैल्यूएशन 50 करोड़ हो जाती है। अब कंपनी का शेयर होल्डिंग पैटर्न कुछ इस तरह से होगा

40% शेयर अभी भी कंपनी के पास ही है जो किसी को Allot नहीं किये गए है
Venture Capitalist ने पांच करोड़ में दस प्रतिशत की इक्विटी के साथ कंपनी की वैल्यूएशन को दस करोड़ से सीधा पांच गुना बढ़ाकर पचास करोड़ पर पंहुचा दिया । अब कंपनी का नया वैल्यूएशन कुछ इस तरह से होगा।

 

कंपनी में अब सब कुछ बढ़िया चल रहा है कंपनी का मुनाफा भी बढ़ रहा है। कंपनी अब एक अच्छा ब्रांड बना चुकी है जिसकी लोकप्रियता दिनों दिन बढ़ती जा रही है। 2 साल बीतने के साथ कंपनी अपार सफलता के साथ साथ नए आयाम छू रही है। अब प्रमोटर को लगता है की उसे 5 शहरो में नए स्टोर्स खोलने चाइए लेकिन इसके लिए ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग के साथ साथ नए स्टाफ की जरुरत होगी। नए स्टोर्स को खोलने का कुल खर्च 25 करोड़ होगा। इस तरह के खर्च जब कंपनी अपना बिज़नेस बढ़ाने या बेहतर बनाने के लिए करती है उसे कैपेक्स कहते है।



अब 25 करोड़ की जरुरत को पूरा करने के लिए कंपनी के मैनेजमेंट के पास बहुत सारे विकल्प है।

  • कंपनी ने पिछले सालो में जो पैसा कमाया है उन पैसो से कैपेक्स की जरुरत को पूरा किया जा सकता है।
  • कंपनी किसी भी बैंक से लोन ले सकती है। कंपनी अच्छा बिज़नेस कर रही है और अच्छा मुनाफा भी कमा रही है तो बैंक से लोन में भी कोई दिक्कत नहीं होगी।
  • कंपनी किसी दूसरे VC के पास जाकर फंडिंग मांग सकती है। कंपनी को फंडिंग के बदले VC को शेयर्स देने होंगे जिसे सीरीज B फंडिंग भी कह सकते है।

मैनेजमेंट को ऊपर के सब विकल्पों में से आखरी का विकल्प सबसे बढ़िया लगता है।
कंपनी को अब एक ऐसा VC मिलता है जो 25 करोड़ के बदले 15% इक्विटी के साथ कंपनी में इन्वेस्ट करने को राज़ी है और इसी के साथ अब कंपनी की नई वैल्यूएशन 50 करोड़ से बढ़कर (25 करोड़ – 15%) के हिसाब से 167 करोड़ हो गयी। अब कंपनी का शेयर होल्डिंग पैटर्न कुछ इस तरह से होगा

 

Private Equity

अभी भी कंपनी के पास 25% शेयर ऐसे है जो किसी को allot नहीं किये गए है। आपने देखा की कंपनी की पूंजी किस तरह से बढ़ती है। अब कंपनी बहुत अच्छा कारोबार कर रही है और मुनाफा भी लगातार अच्छा हो रहा है। लोग अब कंपनी को अच्छे से जानते है और लोगो में उनके प्रोडक्ट्स का बहुत ज्यादा क्रेज है। 5 साल बाद अपनी लोकप्रियता को देखते हुए कंपनी के प्रमोटर को लगता है अब उन्हें पुरे देश भर में अपने 10 stores और खोलने चाइए जिसके लिए 100 करोड़ का खर्चा आएगा।

Private Equity

 

कंपनी अपने शेयर्स किसी VC इन्वेस्टर्स को देकर फंडिंग ले सकती है लेकिन कंपनी अब चाह कर भी VC से फंडिंग नहीं ले सकती क्योकि VC फंडिंग महज़ कुछ करोड़ की हो सकती है। अब कंपनी को एक PE के पास जाना होगा। इस तरह के इन्वेस्टर्स कंपनी में इन्वेस्ट को लेकर बहुत जानकारी रखते  है और कंपनी में बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट करते है। वो बड़ी रकम तो निवेश करते ही है साथ में कंपनी के बोर्ड में अपने लोग भी बिठा देते है। जो कंपनी को सही दिशा में ले जाने का काम करते है। इन निवेशकों को प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर कहा जाता है।

100 करोड़ की फंडिंग के लिए कंपनी को एक PE इन्वेस्टर मिल जाता है। इस राशि के बदले कंपनी ले 10% शेयर्स PE को मिल जाते है। इस तरह 10% इक्विटी के बदले 100 करोड़ के हिसाब से कंपनी की वैल्यूएशन अब हज़ार करोड़ हो जाती है। लेकिन कंपनी के पास अभी भी 15% शेयर्स ऐसे पड़े है जो किसी को  भी allot नहीं किये गए है। कंपनी के इन 15% शेयर की कीमत नई वैल्यूएशन के हिसाब से 150 करोड़ है।

 

IPO (Initial Public Offering)

दो साल बाद कंपनी का कारोबार बहुत ज्यादा बढ़ गया है और मुनाफा भी अच्छा हो रहा है। ऐसे में कंपनी के सभी इन्वेस्टर्स बहुत खुश है लेकिन कंपनी के प्रमोटर ज्यादा खुश नहीं है। प्रमोटर कंपनी को एक विश्व स्तर तक लेके जाना चाहता है और इसके लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ साथ नए लोगो को नौकरी पर रखना पड़ेगा । रियल एस्टेट पर भी ज्यादा खर्चा आएगा। मैनेजमेंट के अनुमान के अनुसार इन सब पर लगभग 300 करोड़ का खर्च होगा।

300 करोड़ के खर्च को निकालने के लिए अब कंपनी के पास कुछ विकलप है:-

  • कंपनी अपने आंतरिक स्त्रोत से पैसा निकल सकती है ( मुनाफे  से )
  • बैंक से क़र्ज़ लिया जा सकता है
  • सीरीज डी फंडिंग की जा सकती है
  • आईपीओ के जरिये शेयर जारी कर पैसा जमा करना

मैनेजमेंट को ऊपर के सभी विकल्पों में से आईपीओ के जरिये पैसा जमा करना सबसे सही लगता है। बैंक से क़र्ज़ लेने पर कंपनी को भरी भरकम ब्याज देना होगा जो कंपनी के मुनाफे को कम कर देगा। ऐसे में आईपीओ के जरिये शेयर आम आदमी को जारी कर पैसा जमा करने का विकलप मैनेजमेंट को सबसे सही लगता है।

 

अभी कंपनी के पास 15% शेयर पड़े है। जिनकी PE की वैल्यूएशन के हिसाब से 150 करोड़ की वैल्यू है। PE के निवेश के बाद कंपनी का कारोबार बहुत तेज़ी से बड़ा है। ऐसे में उम्मीद है की आज इन शेयर की कीमत लगभग 300 करोड़ होगी ।

15% शेयर यानि 15 लाख शेयर्स कंपनी के पास है। 15 लाख शेयर्स की किम्मत 300 करोड़ पर आंकी गयी है और इस हिसाब से  एक शेयर की कीमत लगभग 2000 होगी।

आईपीओ से पैसा जुटाने के अलावा Company को कुछ और भी फायदे है :-




  • आईपीओ के बाद जब कंपनी लिस्ट हो जाती है तो ऐसे में कोई भी शेयर को खरीद और बेच सकता है। ऐसे में कंपनी के सभी इन्वेस्टर्स को अपने शेयर्स बेचने का रास्ता मिल जाता है। इस तरह से प्रमोटर, एंजेल ,PE,VC सभी लोगो को अपना पैसा निकालने का रास्ता मिलता है।
  • आईपीओ के बाद लिस्टेड होने पर कंपनी के शेयर्स को आम आदमी खरीद और बेच सकता है ऐसे में उस कंपनी को और ज्यादा  लोग जानने लगते है और कंपनी का नाम भी बढ़ जाता है।

 

 

Disclaimer: किसी भी तरह के निवेश से पहले एक्सपर्ट्स से जानकारी या राय जरूर ले। हम आपको किसी भी तरह के निवेश की सलाह नहीं देते। स्टॉक मार्किट में वितिय जोखिम शामिल है।

Disclaimer: This post is for educational purpose only. Investment in Stock market involves financial risk. Please invest at your own risk. we are not registered with SEBI.

 

 



Raj Kakkar

Raj is a Trader & Blogger by Passion. He loves to spread the information that helps to learn new skills...<a href="http://www.iamrajkakkar.com">Let's Succeed Together</a>

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